Friday, September 18, 2015

दंतेवाड़ा में होगा पहला जैविक सुपर मार्केट


जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य का पहला ऑर्गेनिक सुपर मार्केट दंतेवाड़ा में बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय के सर्किट हाऊस के सामने इसका निर्माण शुरू हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूरे राज्य में अब तक किसी भी जिले में इतने बड़े किसान समूह वाले आर्गेनिक मार्केट की शुरूआत इससे पहले नहीं हुई थी। लिहाजा यह राज्य का पहला ऐसा मार्केट होगा। इसमें किसानों द्वारा जैविक विधि से उगाए गए धान के अलावा सब्जियों की बिक्री की सुविधा भी मिलेगी। 

सुपर मार्केट का संचालन दूध उत्पादन, प्रोसेसिंग और बिक्री के लिए जिले में संचालित क्षीरसागर को-आपरेटिव सोसाइटी की तर्ज पर स्थानीय किसानों की एग्रीकल्चर फार्मर्स को-आपरेटिव समिति करेगी। निर्माणाधीन सुपर मार्केट में किसानों की को-आपरेटिव समिति द्वारा जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी स्टॉल तो होंगे ही, ग्रामीण इलाकों से आने वाले किसानों के लिए सब्जियों की खुदरा बिक्री के लिए भी जगह का पर्याप्त इंतजाम रहेगा। समिति में जिले के जैविक कृषि समूहों के 500 से अधिक किसान जुड़ेंगे। समिति के पंजीयन की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। 

दंतेवाड़ा को राज्य का पहला जैविक कृषि जिले के तौर पर विकसित करने का प्रयास पिछले 2 साल से जारी है। जिले में पहले ही रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए जीवामृत खाद बनाने और कीट नियंत्रित करने उपयोगी हांडी दवा बनाने की ट्रेनिंग जिले भर के किसान समूहों को दी जा रही है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बेहिसाब उपयोग से अनाज और सब्जियों के स्वाद में बदलाव महसूस किया जाने लगा है। जैविक विधि से उगाई गई फसल को स्वास्थ्यवर्धक और निरापद माना जाता है, जिससे पिछले कुछ सालों से जैविक उत्पादों के इस्तेमाल के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ा है। मार्केट में बनने वाले मिनी कोल्ड स्टोरेज में किसान सब्जियों को 2-3 दिन तक सुरक्षित रख पाएंगे। 

अधिक दिनों तक सुरक्षित रखने की जरूरत पडऩे पर वन विभाग के बड़े कोल्ड स्टोरेज का भी उपयोग किया जा सकेगा। यहां पंजीकृत किसान समूहों को ही प्राथमिकता मिलेगी। दंतेवाड़ा के जिलाधिकारी केसी देवसेनापति के मुताबिक जैविक विधि से उगाई जाने वाली फसल के लिए मार्केट दिलाने के प्रयास अरसे से किए जा रहे थे ताकि किसानों को प्रोत्साहित किया जा सके।
SOURCE - business-standard

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