Friday, September 18, 2015

बेहतर उपज के लिए आधुनिक विधि पर जोर

कम खर्च और कम समय में अधिक उत्पादन लेने के लिए बिस्तर जिले के किसान आधुनिक तकनीकी अपना रहे हैं। अब वे इजरायली मचलिंग विधि के बाद चीन और जापान की ग्रॉफ्टिंग विधि से खेती कर रहे हैं। पहली बार हो रही इस खेती में किसानों को बड़े पैमाने पर फायदे की उम्मीद है। अंचल के प्रगतिशील किसान राजेश नायडू ने बताया कि मल्चिंग विधि से खेती करने में किसानों को कम खर्च में सामान्य से 2 गुना लाभ होता है, जबकि ग्राफ्टिंग में लागत से 5 गुना से अधिक लाभ मिलता हैै। उन्होंने बताया कि इस विधि से वे 3 एकड़ में बैगन की खेती कर रहे हैं। वहीं इस विधि में किसान 10 से 12 महीने तक पैदावार ले सकते हैं।

इसी विधि से 5 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे एक अन्य किसान योगेश टांक ने बताया कि इस विधि से खेती करने में वायरस और अन्य कीट-व्याधियों का प्रकोप नहीं के बराबर होता है, जिसके चलते उत्पादन में काफी वृद्धि होती है। किसान ने बताया कि इससे खेती में हो रहे फायदे को देखते हुए कई किसान इस विधि से खेती की जानकारी लेने उनके पास आ रहे हैं। एक अन्य किसान ने बताया कि बैगन व टमाटर के अलावा किसान लौकी, टिंडा, खरबूज-तरबूज और शिमला मिर्च की खेती ग्राफ्टिंग विधि से कर सकते हैं। इसके लिए दूसरी विधि अपनाई जाती है। जिसकी जानकारी किसान को खेती करने से पहले दे दी जाती है, ताकि किसान समय पर खेतों में उपयुक्त व्यवस्था कर सकें। 

मंडी में अमचूर के नहीं खरीदार

बेमौसम बारिश से इमली के बाद अब अमचूर के कारोबार पर भी असर पड़ता दिख रहा है। कारोबारियों की तमाम कोशिशों के बाद भी अमचूर की आवक गुणवत्ता के हिसाब से नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर आवक कम होने से इस साल कारोबार भी कम रहने का अंदेशा है। मंडी में इस समय जो अमचूर आ रहा है, उसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं है, जिससे दाम भी कम मिल रहे हैं। वहीं मंडी के व्यापारियों को कोई लिवाल भी नहीं मिल रहा है। व्यापारियों ने बताया कि बारिश के चलते आम की फसल बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई है। मंडी में अमचूर की आवक शुरू हो गई है, लेकिन जिस तरह की गुणवत्ता की उम्मीद कारोबारी कर रहे थे, वैसा अब तक दिखा नहीं है।
SOURCE - business-standard

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